Tuesday, 14 February 2017

भोलेनाथ

देखिये पुराणों से जुड़ी है ये घटना, शिव पुराण तो मैंने पढ़ा नहीं, न ही कभी शिव कथा को पूरी तरीके से पढ़ा या सुना है पर आज अचानक से फेसबुक वॉल पे घूमते-घूमते शिव जी की इक तस्वीर आँखों के सामने आ गयी और साथ ही साथ नानी की वो कहानी भी।  तो हुआ यूँ की इक बार महालक्ष्मी शायद ऐसे ही किसी अलसायी सी दुपहरी में बैठी श्रीविष्णु के चरण-कमल दबा रहीं थी। अब बोरियत तो हो ही जाती...

Thursday, 2 February 2017

बेंच से उठ के केबिन तक।

छः पचपन की ट्रेन पकड़ कर मैं सोम से शुक्र आता हूँ। फिर नौ बजे दफ़्तर पहुँच उस बेंच पर बैठ जाता हूँ| बगल मे मेरे बैठी रहती काली सी एक बैग मेरी। नाति-पोतों ने अब जिसे नाम दे दिया "बैगवती"। अब तो राम सिंघ भी चाय  बिस्कुट पूछ आता है। हर रोज़ दफ़ा दो बार वो मुझे  देख मुस्कुराता है| कभी कभी यूँ बैठे-बैठे मैं इस सोच में पड़ जाता हूँ। क्यों खुद को इस राह में मैं निरीह अकेला...