Monday, 27 May 2024

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए

आज कल दिमाग में ये बात कई बार आती जाती रहती है। आते वक्त ये एक आदमी के साए के रूप में आती है जो कभी मेरे बगल बैठा हुआ रहता है या साथ चल रहा होता है।  लौटने तक उसकी चहलकदमी मेरे पीछे छूट जाती है और बस बेचैनी रह जाती है। ये बात के बस याद आने से लेकर उसके टीस में बदल जाने तक का सफ़र था।  यादों की तरह, हकीकत पर भी किसी का कोई काबू नहीं है। कौन कब किस दरवाज़ के उस पार...