Sunday, 6 December 2015

कॉफी

मैने कॉफी की मग नीचे रख, तुमसे सवाल किया ही था की जिस काम के लिए गये थे वो हुआ या नही, की तुम यूँ ही उठ के दरवाज़े से निकल गये| मुझे लगा की शायद कोई ज़रूरी काम याद आ गया हो वरना तुम भला मेरे सवालों को ऐसे अनदेखा कर तो नही जाओगे.शाम तक राह देखती रही तुम्हारे आने का. आज उस शाम को बीते भी 4 शाम हो चुके हैं| हाथों मे वही कॉफी की मग लिए जब खिड़की पर खड़ी होती हूँ , तुम्हारी वो पीली...